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भारत में बढ़ते मनी लॉन्डरिंग को नियंत्रित करने में ED की भूमिका




मनी लॉन्ड्रिंग का उद्देश्य अवैध गतिविधियों से उत्पन्न नक़दी के स्रोत को छिपाना है, इसी क्रम में हवाला का उपयोग अक्सर मनी लॉन्डरिंग के लिए एक प्रणाली के रूप में किया जाता है।

हाल फ़िलहाल में भारत में मनी लॉन्डरिंग के केस में वृद्धि देखी गई है जो की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019-20 में 562 मामले, वर्ष 2020-21 में 981 मामले, वर्ष 2021-22 में 1180 मामले और वर्ष 2022-23 में कुल मामलों की संख्या लगभग 949 देखी जा सकती है।



इनमें से हाल में दिल्ली का आबकारी नीति घोटाला काफ़ी चर्चा में रहा।
आबकारी नीति घोटाला क्या है?
सीबीआई और ईडी ने आरोप लगाया है कि आबकारी नीति को संशोधित करते समय अनियमितता की गई थी और लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ दिया गया था। इसमें लाइसेंस शुल्क माफ या कम किया गया था। इस नीति से सरकारी खजाने को 144.36 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस मामले में अब तक अरविंद केजरीवाल मनीष सिसोदिया संजय सिंह और के कविता गिरफ्तार हो चुके हैं।



इसी क्रम में ED आजकल सक्रिय भूमिका में नज़र आ रही है, ED एक अनुशासनात्मक संगठन है जो भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग का हिस्सा है। यह दो विशेष राजकोषीय कानूनों— विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 *(FEMA)* और धन की रोकथाम अधिनियम, 2002 *(PMLA)* के प्रावधानों को लागू करने का कार्य करता है।

ED भगौड़े आर्थिक अपराधियों के मामलों पर भी कार्यवाही करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र से बाहर रह कर भारत के क़ानून की प्रक्रिया से बच ना सकें। इसके कुछ प्रसिद्ध उदाहरण विजय माल्या और नीरव मोदी के केस हैं।



हाल फ़िलहाल मनी लॉन्डरिंग के कई सारे केसों की वजह से ED चर्चा में है, उदाहरण स्वरूप दिल्ली का शराब नीति घोटाला, NCP विधायक का सहाकारी बैंक घोटाला, सुपरटेक के चेयरमैन की गिरफ़्तारी, एमवे इंडिया की 757 करोड़ की संपत्ति अटैच, प्रसिद्ध अभिनेत्री जैकलीन फर्नाडिस तथा यामी गौतम आदि का मामला।

हालाँकि बोहोत से विपक्षी दल सरकार पर ED के दुरुपयोग का भी आरोप लगाते हैं तथा इसके राजनीतिक फ़ायदे के लिए भी इस्तेमाल का आरोप लगाते हैं।
   
                        आयुष मिश्र

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