Skip to main content

'विश्व वन्यजीव दिवस' पर रामानुजन कॉलेज में आयोजित हुआ वृक्षारोपण कार्यक्रम

 रामानुजन कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय की एनएसएस शाखा ने विश्व वन्यजीव दिवस के उपलक्ष्य में वृक्षारोपण अभियान कार्यक्रम का आयोजन किया।  कार्यक्रम की शुरुआत सम्मानित प्राचार्य और उप-प्राचार्य डॉ.एस.पी.अग्रवाल और डॉ. टी के.मिश्रा ने पौधारोपण करके की।उन्होंने  हमें अपने जीवन में प्रकृति के महत्व से अवगत कराया।  डॉ. आलोक रंजन पांडे, सहायक प्रोफेसर, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी, रामानुजन कॉलेज ने सभी संकाय सदस्यों डॉ. के.लता,  डॉ समन्ता, डॉ. सुमित नागपाल, डॉ. राजीव नयन, डॉ. विभास कुमार, डॉ. जेएन चौधरी , विकास कुमार, मुकेश मंडोला आदि का स्वागत किया।  डॉ. अग्रवाल ने कहा कि हम अपनी प्रकृति को संरक्षित करें, यह हमारे भविष्य की पीढ़ियों के लिए और हमारे पर्यावरण को बनाए रखने के लिए  महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी को अपनी पृथ्वी की ओर एक कदम आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया और साथ ही सभी ने अपने पर्यावरण की रक्षा के लिए इस  दिन पर संकल्प लिया।  कॉलेज परिसर में लगभग 15-20 पौधे लगाए गए हैं, इसमें इलायची, लता और बहुत कुछ शामिल हैं।  मुख्य अतिथि एपी पाढ़ी (ओडिशा के पूर्व कुलपति), उज्जवल सिंह (प्रोफ़ेसर, राजनीति विज्ञान) और मधु विज (प्रोफेसर, एफएमएस विभाग) ने भी वहां अपनी उपस्थिति दर्ज कर कार्यक्रम को बढ़ाया और कॉलेज के क्षेत्र में पौधे भी लगाए। कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. पाढ़ी मौजूद थे, उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी को इन सभी को प्रकृति का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि एक इंसान होने के नाते यह हमारा कर्तव्य है। डॉ. चौधरी ने भी अधिक से अधिक पेड़ लगाने के लिए कहा और उनकी देखभाल भी करनी चाहिये ऐसा उनका मानना था क्योंकि बाद में उन्हें बड़े होता देख बहुत खुशी मिलती है। अंत में, डॉ. पांडे ने सभी संकाय सदस्यों और स्वयंसेवकों को उनकी उपस्थिति के लिए और इसे एक सफल वृक्षारोपण अभियान बनाने के लिए धन्यवाद दिया। इस कार्यक्रम को अंतिम वर्ष के छात्रों अविका गर्ग और तरसेम कासनी ने कुशलतापूर्वक संचालित किया। प्रतिष्ठित समाचार पत्र फोकस मीडिया ने मीडिया पार्टनर के तौर पर अपनी भागीदारी दर्ज की।

Comments

Popular posts from this blog

डॉ. अमिता दुबे, प्रधान संपादक, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, उत्तर प्रदेश द्वारा लिखित 'सृजन को नमन' पुस्तक पर देश के विद्वानों ने की चर्चा

विश्व हिंदी संगठन से समन्वित सहचर हिंदी संगठन, नई दिल्ली (पंजी.) द्वारा हर महीने पुस्तक परिचर्चा कार्यक्रम के तहत डॉ. अमिता दुबे द्वारा लिखित पुस्तक सृजन को नमन पर लाइव ऑनलाइन परिचर्चा हुई, जिसमें देश भर के साहित्यकारों ने जुड़कर विद्वानों को सुना। इस पुस्तक के लेखक डॉ. अमिता दुबे जी ने बताया कि मूलत: वे स्वाभवत: कहानीकार हैं परंतु विद्यावाचस्पति की अध्ययन के दौरान उनकी रुचि आलोचना की ओर प्रवृत्त हुआ। उन्होंने आगे बताया कि किस तरह इस पुस्तक को लिखा। इसमें उन्होंने अपने जीवनानुभवों को भी व्यक्त किया है।  कार्यक्रम में राजस्थान से जुड़ी डॉ.बबीता काजल ने यह पुस्तक में लिखे शोध आलेख हैं । जो शोधार्थियों और साहित्यानुरागी के हेतु अत्यंत उपयोगी होगी । सामाजिक परिवेश अत्यंत महत्वर्पूण होता है जहाँ रचनाकार को लेखन के बीज मिलते हैं। चिट्ठियों की दुनिया में राष्ट्राध्यक्षों के बीच हुए वार्तालाप को कविता के रूप में रचा है जो अपने आप में एक अलग क्षितिज को दिखाता है। पुस्तक में हिंदी प्रचार एवं महत्व को उल्लेखित किया गया, देवनागरी लिपि की विशेषता का उल्लेख ध्वनि वैज्ञानिक दृष्...

ट्विटर ने केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का एकाउंट एक घंटा ब्लॉक किया

ट्विटर और केंद्र सरकार में टकराव जारी है।  इस बीच आज केंद्रीय IT मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दावा किया है कि Twitter ने करीब एक घंटे तक उनका अकाउंट लॉक रखा। Twitter का कहना था कि आपने अमेरिका के डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट एक्ट का उल्लंघन किया है। बाद में Twitter ने अकाउंट अनलॉक किया। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कोई भी प्लेटफॉर्म कुछ भी कर ले आईटी को लेकर नया कानून मानना ही पड़ेगा। इसे लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। ट्विटर की कार्रवाई यह बताती है कि वो बोलने की आजादी का हितैषी नहीं, उसे सिर्फ अपना एजेंडा चलाने में दिलचस्पी है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि ट्विटर की कार्रवाई आईटी के नियमों के खिलाफ है। अकाउंट लॉक करने से पहले ट्विटर ने मुझे कोई नोटिस नहीं दिया। इससे साबित होता है कि ट्विटर नए नियमों को नहीं मानना चाहता है। अगर ट्विटर नए नियमों का पालन करता तो वो किसी के अकाउंट को मनमाने तरीके से लॉक नहीं करता। बता दें कि ट्विटर और केंद्र सरकार में लंबे समय से विवाद चल रहा है। सरकार का कहना है कि ट्विटर को नया नियम मानना होगा। नए नियमों के तहत ट्विटर, फेसबुक, ...

मन्नू भंडारी की पहली कहानी : मैं हार गई

जब कवि सम्मेलन समाप्त हुआ तो सारा हॉल हंसी-कहकहों और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज रहा था| शायद मैं एक ऐसी थी, जिसका रोम-रोम क्रोध से जल रहा था| उस सम्मेलन की अंतिम कविता थी 'बेटे का भविष्य'| उसका सारांश कुछ इस प्रकार था, एक पिता अपने बेटे के भविष्य का अनुमान लगाने के लिए उसके कमरे में एक अभिनेत्री की तस्वीर, एक शराब की बोतल और एक प्रति गीता की रख देता है और स्वयं छिपकर खड़ा हो जाता है| बेटा आता है और सबसे पहले अभिनेत्री की तस्वीर को उठाता है| उसकी बाछे खिल जाती हैं| बड़ी हसरत से उसे वह सीने से लगाता है, चूमता है और रख देता है| उसके बाद शराब की बोतल से दो-चार घूंट पीता है| थोड़ी देर बाद मुंह पर अत्यंत गंभीरता के भाव लाकर, बगल में गीता दबाए वह बाहर निकलता है| बाप बेटे की यह करतूत देखकर उसके भविष्य की घोषणा करता है, "यह साला तो आजकल का नेता बनेगा!" कवि महोदय ने यह पंक्ति पढ़ी ही थी कि हॉल के एक कोने से दूसरे कोने तक हंसी की लहर दौड़ गई| पर नेता की ऐसी फजीहत देकर मेरे तो तन-बदन में आग लग गई| साथ आए हुए मित्र ने व्यंग्य करते हुए कहा, "क्यों तुम्ह...