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मातृभाषा दिवस पर रामानुजन कॉलेज की एनएसएस शाखा और विश्व हिंदी संगठन द्वारा किया गया आयोजन


रामानुजन महाविद्यालय,दिल्ली विश्वविद्यालय के एनएसएस तथा विश्व हिंदी संगठन के संयुक्त तत्वावधान में मातृभाषा दिवस  के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम की शुरुआत श्री गोविंद गुरु विश्वविद्यालय,गोधरा गुजरात की एसोसिएट प्रोफ़ेसर सुशीला व्यास  ने निराला जी द्वारा रचित सरस्वती वंदना का गायन कर किया।रामानुजम कॉलेज के सहायक प्रोफेसर तथा एनएसएस, प्रोग्राम अधिकारी डॉ. आलोक रंजन पाण्डेय ने सभी वक्ताओं का सहृदय स्वागत किया। डॉ. आलोक रंजन पाण्डेय  ने बताया कि 21 फरवरी को मातृभाषा दिवस कब से मनाया जाता है तथा इतिहास क्या है,इसका विस्तार से जिक्र किया है । सर ने बताया कि भारत में वर्तमान समय में लगभग 17 सौ भाषाएँ बोली जाती है, वही विश्व स्तर पर सात हज़ार के लगभग भाषाएँ बोली जाती है। सभी को अपनी मातृभाषा के प्रति एक क़दम और आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है।उन्होंने बहुत ही सूक्ष्मता से ही मात्रभाषा की प्रासंगिकता एवं इतिहास का परिचय दिया है।

कार्यक्रम की शुरुआत में आशीर्वचन के रूप में रामानुजम कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर एस पी अग्रवाल ने अपनी बात रखी और कहा कि सभी को मातृभाषा पर गर्व  करना चाहिए तथा अन्य भाषाओं का सम्मान करना चाहिए। अंत में उन्होंने कहा कि हमें अधिकाधिक अपनी मातृभाषा का प्रयोग करना चाहिए। इसके पश्चात प्रथम वक्ता के रूप में श्री  गोविंद गुरु विश्वविद्यालय गोधरा गुजरात की एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉक्टर सुशीला व्यास जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि माँ के पश्चात अगर कोई सर्वाधिक प्यारा और हमारे सबसे नज़दीक होता है तो वह हमारी मातृभाषा। उन्होने बच्चे के जन्म और उसके साथ मातृभाषा के संबंध और उसकी प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन किया है। मातृभाषा हमारी सांस्कृतिक आधार भूमि होती है।उन्होने बताया कि मनुष्य की आत्मअभिव्यक्ति मातृभाषा  में ही संभव है।
 इसके पश्चात कॉलेज की छात्रा भावना ने अपनी मातृभाषा में एक पहाड़ी गीत प्रस्तुत किया।

तत्पश्चात द्वितीय वक्ता के तौर पर शहीद भगत सिंह कॉलेज के सहायक प्रोफ़ेसर सुनील कुमार तिवारी जी ने अपनीबातरखी। उन्होंने कहा कि जब एक भाषा मरती है तो उसके साथ साथ एक संस्कृति एक सभ्यता भी नष्ट हो जाती है। उन्होंने अपनी मातृभाषा को और अधिक बढ़ावा देने तथा अधिकाधिक प्रयोग बिना किसी हिचकिचाहट के करने चाहिए,ऐसी प्रेरणा दी है।

इसी क्रम में अंतिम वक्ता के रूप में श्यामलाल कॉलेज के सहायक प्रोफ़ेसर डॉक्टर अमित सिंह जी ने अपनी बात रखी तथा व्यवहारिक तौर पर अनेक भाषाओं जैसे राजस्थान,ब्रज,हरियाणवी में उन्होंने अपने गीत के माध्यम से अपने वक़्त तब को समझाने का प्रयत्न किया है उन्होंने इस शुभकामना के साथ अपनी बात समाप्त किया कि हम अपनी मातृभाषा को अधिक बेहतर कैसे बनायें व उसका विकास कैसे करें।अंत में  डॉक्टर आलोक रंजन पांडे ने सभी वक्ताओं के प्रति धन्यवाद तथा आभार प्रकट किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन द्वितीय वर्ष के छात्र रूपेश चौधरी ने बड़ी कुशलता के साथ किया।

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