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दर्शन आत्मा की मूलभूत अनुभूति है: प्रो. सुधांशु कुमार शुक्ला


मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पंडित मदनमोहन मालवीय राष्ट्रीय शिक्षक एवं शिक्षण मिशन, शिक्षण अध्ययन केंद्र, रामानुजन कॉलेज, श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज,दिल्ली विश्वविद्यालय,आरमापुर पी.जी. कॉलेज, कानपुर और माउंट कार्मेल कॉलेज, बेंगलुरु के संयुक्त तत्वावधान में पाक्षिक संकाय समवर्धन कार्यक्रम के पांचवे दिन के प्रथम सत्र में पुस्तकालय कार्यक्रम का आयोजन हुआ । कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में पाॅलेंड वार्सा में हिंदी चेयर के पद पर कार्यरत  प्रो. सुधांशु कुमार शुक्ला जी आमंत्रित रहे । उन्होंने ' विभिन्न दर्शनों का साहित्य और समाज पर प्रभाव' विषय पर सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने दर्शन की परिभाषा बताते हुए विभिन्न दर्शनों को व्याख्यायित किया। उन्होंने विभिन्न दर्शनों के विचारों को सभी प्रतिभागियों के समक्ष स्पष्ट किया। दर्शन और राष्ट्र को उन्होंने जोड़ते हुए दर्शन को राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। राष्ट्र, संस्कृति और भाषा की महत्ता पर उन्होंने प्रकाश डाला। विभिन्न दर्शनों के साहित्य को सउदाहरण प्रस्तुत किया तथा जीवन में उनकी उपयोगिता सिद्ध की।

कार्यक्रम के तृतीय सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डाॅ. बिपिन कुमार तिवारी जी आमंत्रित रहे। उन्होंने  'डिकोडिंग पोलिटिक्स ऑफ लैंग्वेज' विषय  पर सारपूर्ण  व्याख्यान प्रस्तुत किया । उन्होंने भाषाई राजनीतिकरण से अपनी बात की शुरूआत करते हुए बहुसंस्कृतिवाद को स्पष्ट किया। डिकोडिंग पोलिटिक्स ऑफ लैंग्वेज का अर्थ उन्होंने प्रतिभागियों के समक्ष प्रस्तुत किया। भारत में हिंदी भाषा की स्थिति से सबको अवगत करवाया तथा हिंदी के प्रति सजगता और प्रचार- प्रसार की ओर उन्होंने सबको प्रेरित किया। अंत में उन्होंने नई शिक्षा नीति पर अपने विचार प्रकट किए

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