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16 लाख किमी प्रति घंटे की रफ्तार से धरती की तरफ बढ़ रहा है सौर तूफान, वैज्ञानिकों ने जारी की चेतावनी


शक्तिशाली सौर तूफान तेज गति से धरती की ओर बढ़ रहा है। बताया जा रहा है कि यह 13 जुलाई से 24 घन्टे तक कभी भी धरती से टकरा सकता है। यह तूफान करीब 16 लाख किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धरती की तरफ बढ़ रहा है। यह सूरज की सतह से पैदा हुआ एक शक्तिशाली तूफान है, जिसका धरती पर भारी प्रभाव पड़ सकता है। ये सौर तूफान सूरज के वायुमंडल में पैदा हुआ है, इसके कारण चुंबकीय क्षेत्र के प्रभुत्व वाला अंतरिक्ष का एक क्षेत्र काफी ज्यादा प्रभावित हो सकता है। इस तूफान के चलते वैज्ञानिकों को चेतावनी जारी की है। इसके तहत लोगों को जरूरी ना हो तो विमान यात्रा करने से बचने को कहा गया है, क्योंकि सैटेलाइट सिग्नलों में बाधा आ सकती है। विमानों की उड़ान, रेडियो सिग्नल, कम्यूनिकेशन और मौसम पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। 


 कैसे पहुंचा सकता है नुक्सान 

 इस सौर तूफान के कारण धरती का बाहरी वायुमंडल गर्म हो सकता है, जो सीधा सैटेलाइट्स को प्रभावित करेगा। इसका असर फोन के सिग्नल, सैटेलाइट वाले टीवी और जीपीएस नैविगेशन पर होगा, जिससे इनमें रुकावट आ सकती है वहीं, पावर लाइन में करंट आने का भी खतरा बना रहता है। हालांकि, धरती का चुंबकीय क्षेत्र इसके खिलाफ सुरक्षा कवच की तरह काम करता है, इसलिए ऐसा होने का संभावना ना के बराबर ही रहती है। वहीं जो लोग उत्तरी या दक्षिणी अक्षांशों पर रहते हैं, उन्हें रात के वक्त खूबसूरत ऑरोरा दिखाई दे सकता है। ऑरोरा ध्रुव के पास रात के समय आसमान में चमकने वाली रोशनी को कहते हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने तूफान की रफ्तार 1609344 किलोमीटर प्रति घंटा बताई है। एजेंसी का कहना है कि इसकी गति और ज्यादा भी हो सकती है। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरिक्ष में महातूफान आ जाए, तो उससे धरती के लगभग सभी शहरों की बिजली जा सकती है, जो कि बिल्कुल अच्छी खबर नहीं है।


इससे पहले भी आ चुका है सौर तूफान 

 इससे पहले साल 1989 में भी सौर तूफान की वजह से कनाडा के क्‍यूबेक शहर में 12 घंटे के लिए बिजली चली गई थी। उस दौरान लाखों लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। वहीं, साल 1859 में जियोमैग्‍नेटिक तूफान आया था, जिसने यूरोप और अमेरिका में टेलिग्राफ नेटवर्क को तबाह कर दिया था।


                   ~ रिपोर्ट - नीलाक्ष वत्स

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